Friday, March 2, 2018

बड़े अरमान है कि मखमली

बड़े अरमान है कि, मखमली गालो पे रंग डालूँ।
कि वो हँसते रहे, हँसते हुए मै उनपे  रंग डालूँ।।
कि ख्वाबो की कोई ताबीर हो जाती है होने दो ।
वो मुझको अपना रंग दे दे मै उनपे अपना रंग डालूँ ॥

जो है अरमान पिछले, अबकी होली में मिटा लेना ।
कि  उनके मखमली गालो पे, थोडा रंग लगा लेना ।।
अगर शर्मा रहे है, तो कोई अब बात मत करना ।
मचलती जुल्फ पर उनके, कोई महफ़िल सजा लेना ॥

कि उनके रंग सा अपना कोई रंग तुम बना लेना ।
जो हो दस्तूर होली के वो सब अबकी निभा लेना।।
हमारा क्या है हम अनजान है मत जानना हमको ।
कि जब सब कुछ पता हो जाय तो हमसे बता लेना ॥

खबर अब पूछने की क्या जरुरत है की होली है ।
जो मेरे साथ थी अब तक वो उनके साथ होली है ॥
ये है दस्तूर मिलते है गले सब भूल कर शिकवे ।
अगर उनसे न मिल पाए यू होली पे क्या होली है ।।

अगर इस बार होली में गले मिल लो तो क्या होगा ।
मचलती जुल्फ में अरमान तुम भर लो तो क्या होगा ॥
अनिल रहने भी दो महफ़िल में आये है वो शर्मा के ।
इशारो से सही एक बार कुछ कर दो तो क्या होगा ॥

Sunday, July 24, 2016

राजनीति ने दलित सवर्णों का बंटवारा कर डाला।
आपस के भाई चारे में नफरत गाली भर डाला।

हर चौराहे पर धरना है लाज बचावो लाज बचावो।
अपनी लाज बचाने को इक चीर हरण फिर कर डाला।

सम्मानों के परमवीर कुछ चौराहों पर घूम रहे।
अपनी बहन बहिन कह के दूजे पर हमला कर डाला।

इज़्ज़त इज़्ज़त बड़ा शब्द है बड़ी बात है मालूम है ?
अपनी रख लो उसकी ले लो राजनीति का सच काला।

कुर्सी , सत्ता , राज चुनावो में आते है जाते है।
पर नेतावो ने जनता को भीड़ बना कर रख डाला।

बड़ा कठिन है बड़ा कुटिल है राजनीति का खेल अनिल।
सच को झूठा कहना पड़ता झूठा है सच सच वाला। 

Tuesday, January 15, 2013

मै जोकर ही सही

मै जोकर ही सही तेरी महफ़िल में अनिल।
जो जोकर हू  तो हँसाने के काम आता हू ।

पानी हू मै मुझमे रवानी का हुनर है यारो।
बिसलेरी ना सही पर प्यास बुझाने के काम आता हू।।

दरख़त तुम सा न सही पर छाव बहुत ज्यादा है।
टूट भी जाऊगा तो जलाने के काम आता हू।।

चराग ही सही कुछ देर में बुझ जाऊगा।
जब तलक जलता हू मै रौशनी लुटाता हू।।

खिलाडी हो तो खेल खेलो

खिलाडी हो तो खेल खेलो,
बिछाई है जो उस बिसात में रहो।
वो तिनके नहीं जो फूक से उड़ जाये हम,
आधियों तुम जरा अपनी औकात में रहो।।

ये लखनऊ है शरीफों की महफ़िल है,
कुछ ख्याल करो हदे हालत में रहो।
मै जानता हू  कि हर बात पे बहक जाते हो,
कोशिश करो, काबू रखो, जज्बात में रहो।।

आइना हू तेरा चेहरा दिखा के जाउगा,
जवाब आते है? नहीं तो सवालात में रहो।
मै जुगनू हू न दिया हु जो बुझा दोगे मुझे,
रास्ता मालूम है न इस खुराफात में रहो।। 

था शीशे की तरह मै साफ़

था शीशे की तरह मै साफ़ वो पत्थर समझ बैठे।
जरा सी छाव क्या दे दी वो अपना घर समझ बैठे।।

बड़ी इज्ज़त अदब से पेश आते है शराफत है।
न जाने क्या उन्हें सूझी कि वो जोकर समझ बैठे।।

बढ़ाये थे मदद को हाथ वो मजबूर थे जिस दम।
बड़ा अच्छा सिला पाया कि वो नौकर समझ बैठे।।

संभाला था सड़क पर जब वहां वो लडखडाये थे।
बड़े मासूम वो निकले हमे ठोकर समझ बैठे।। 

Wednesday, March 14, 2012

मेघों का गुंजन

बड़ी ऊँची उड़ाने है, है सारा आसमां उनका ।
बड़ी प्यारी सी सूरत है, है सारा मेड्मा उनका ॥

समाया इन्द्रधनुषी रंग, और मौसम निराले है ।
कि उनके चाँद से चेहरे से, फैले ये उजाले है ॥

अगर वो हो तो रेगिस्तान में भी, फूल खिलते है ।
बड़ी ईमानदारी से, वो अपना काम करते है ॥

मै उनकी शान में अब क्या कहूँ, हिम्मत नहीं होती ।
बस इतना जानिये बरसात की, सूरत नहीं होती ॥

अनिल के साथ बहना काम है उनका, पता होगा ।
दो अक्षर - मात्रा का नाम है उनका, पता होगा ॥

तो सारे मेड्मा में देख लो, उनसा न कोई और है ।
बड़ी इज्ज़त अदब से नाम लेते हूँ, वो मेघा गौर है ॥

( अनिल - हवा )

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नज़र उनकी तराजू है, वो सब कुछ तोल लेती है ।
जो दिल में बात होती है, जुबां से बोल लेती है ॥

है सब कहते कि जब वो बोलती, सरगम निकलते है।
कमर तक स्याह जुल्फों में, सरारे कुछ मचलते है ॥

बड़ी है सादगी उनमे, क़यामत कि नज़र भी है ।
यहाँ सबसे पुरानी है, ये कुछ उसका असर भी है ॥

बड़ी ही साफ़ दिल वाली है, हम सब जानते तो है ।
है दूजा नाम उनका, हम सभी पहचानते तो है ॥

बड़ा ही हेल्फुल नेचर है, भवरों कि वो गुन गुन है ।
सुरीली लोग कहते है कि उनका नाम गुंजन है ॥

Tuesday, October 25, 2011

दिए की रौशनी से सब अँधेरा दूर हो जाये

दिए की रौशनी से सब अँधेरा दूर हो जाये ,
जो दिल में ख्वाहिशे हो वो सभी मंजूर हो जाये
जो अब तक बात दिल में है उसे बहार निकालने दो
जाने कौन सी हो बात जो मशहूर हो जाये

दिए की लौ जरा जलकर निखर जाये तो चलता हूँ ,
वो उनका चाँद सा चेहरा नज़र आये तो चलता हू
सुना है की नज़र उनकी क़यामत है तो होने दो ,
नज़र उनकी इधर एक बार जाये तो चलता हू

हमे कुरता पहनना था बड़ी अच्छी हिदायत है ,
मज़ा तो तब था जब की आप भी घाघरा सिला लेते
महक चारो तरफ बहती चमक चारो तरफ रहती ,
रंगोली ही सजा लेते की कुछ दीपक जला लेते

बुझे चेहरे नज़र मायूश लव खामोश है देखो,
अरे सब साथ आ जाते तो महफ़िल ही सजा लेते ॥
हमे रुकने की जिद है और उन्हें चलने की बेताबी,
की मुंह मीठा करा देते की मुंह मीठा करा लेते ॥