वो नाज़ुक फूल जिसको ढूढ़ते थे हम बहारो में ।
अभी नज़रे उठाई दिख गया वो उन कतारों में ॥
न हो मुझ पर यकी तो आईने से पूछ लो जाकर ।
अभी तक सुर्खी बाकी है हसी लव के किनारों में ॥
नज़ारा और क्या देखू नज़र भर उनको जो देखा ।
अब इससे और ज्यादा क्या हसी होगा नज़रो में ॥
Sunday, August 2, 2009
Sunday, July 26, 2009
बड़े अरमा
बड़े अरमां लिए दिल में उठे थे घर को जाने को ।
मगर अब हम बहुत बेताब है महफ़िल सजाने को ॥
बुघ्हे चेहरे नज़र मायूश लव खामोश है तो क्या ।
कही से ढूढ़ लायेगे हँसी चेहरा सजाने को ॥
कई नगमे , कई नज्मे , कई कौवालिया होगी ।
मगर अब हाथ उठेगे सिर्फ़ ताली बजाने को ॥
मगर अब हम बहुत बेताब है महफ़िल सजाने को ॥
बुघ्हे चेहरे नज़र मायूश लव खामोश है तो क्या ।
कही से ढूढ़ लायेगे हँसी चेहरा सजाने को ॥
कई नगमे , कई नज्मे , कई कौवालिया होगी ।
मगर अब हाथ उठेगे सिर्फ़ ताली बजाने को ॥
Thursday, June 11, 2009
नज़ारे दिख गए
नज़ारे दिख गए मुझसे नज़र भी देख ली मैंने ।
बड़ी फुरसत में बैठे हो नज़र थामे हुए दिल से ॥
तुम्हे यू देख कर कोई सरारत हो गई मुझसे ।
तो उठकर चल न देना तुम कही इस बार महफिल से ॥
बड़ी फुरसत में बैठे हो नज़र थामे हुए दिल से ॥
तुम्हे यू देख कर कोई सरारत हो गई मुझसे ।
तो उठकर चल न देना तुम कही इस बार महफिल से ॥
Tuesday, May 12, 2009
तेरा सर गर मेरे ...
तेरा सर गर मेरे कांधे पे आ जाए तो क्या होगा ।
मेरा दम फिर अगर उस दम निकल जाए तो क्या होगा ॥
ये दिल नादान है सुनता , नही करता है मन मानी ।
ये धड़कन फिर अगर उस दम ठहर जाए तो क्या होगा ।
तेरा जुल्फे गिरा कर अपने चेहरे पर चले आना ।
अगर उस दम कोई बिजली चमक जाए तो क्या होगा ॥
तेरे जलवों की ख्वाहिश थी तेरे जलवे नज़र आए ।
अगर जलवा किसी की जान ले जाए तो क्या होगा ॥
मेरा दम फिर अगर उस दम निकल जाए तो क्या होगा ॥
ये दिल नादान है सुनता , नही करता है मन मानी ।
ये धड़कन फिर अगर उस दम ठहर जाए तो क्या होगा ।
तेरा जुल्फे गिरा कर अपने चेहरे पर चले आना ।
अगर उस दम कोई बिजली चमक जाए तो क्या होगा ॥
तेरे जलवों की ख्वाहिश थी तेरे जलवे नज़र आए ।
अगर जलवा किसी की जान ले जाए तो क्या होगा ॥
Friday, April 24, 2009
वक्त के बढ़ते कदम
वक्त के बढ़ते कदम की आज आहट आ रही है ।
देख कर सूरत तुमाहरी चांदनी शर्मा रही है ॥
वक्त का दरिया है रुक सकता नही अब रोक मत ।
चंद लम्हे रह गए है भागी जा रही है ॥
देख कर सूरत तुमाहरी चांदनी शर्मा रही है ॥
वक्त का दरिया है रुक सकता नही अब रोक मत ।
चंद लम्हे रह गए है भागी जा रही है ॥
Sunday, March 29, 2009
जिधर देखता हूँ
जिधर देखता हूँ उधर बदगुमानी ।
नज़र में बड़ी दूर तक बेईमानी ॥
अजब हो गया है ये दुनिया का मेला ।
न लब पे शराफत न आखों में पानी ॥
बड़ी दूर तक ये नज़र देख आई ।
न मुझको दिया भीड़ में कुछ दिखाई ।।
बड़ा नूर चेहरे पे उतरा हुआ है ।
मगर उससे संजीदा है बेवफाई ॥
नज़र में बड़ी दूर तक बेईमानी ॥
अजब हो गया है ये दुनिया का मेला ।
न लब पे शराफत न आखों में पानी ॥
बड़ी दूर तक ये नज़र देख आई ।
न मुझको दिया भीड़ में कुछ दिखाई ।।
बड़ा नूर चेहरे पे उतरा हुआ है ।
मगर उससे संजीदा है बेवफाई ॥
Sunday, March 15, 2009
चले जाना चले जावो
चले जावो कोई दर और अब तुम खटखटा लेना ।
जो बाकी है गिले शिकवे कभी आकर मिटा लेना ॥
मगर राहों में मिल जावो तो बस इतनी सी है ख्वाहिश ।
जरा नज़रे मिला लेना जरा सा मुस्करा देना॥
जो जाते हो चले जावो निशानी हम भी रख्गे।
तुम्हारे साथ जो गुजरी जवानी हम भी रख्गे॥
कई अफसाने लिखे है यहाँ पर बैठ कर तुमने ।
उसी फेहरिस्त में इक दो कहानी हम भी लिखेगे ॥
जो बाकी है गिले शिकवे कभी आकर मिटा लेना ॥
मगर राहों में मिल जावो तो बस इतनी सी है ख्वाहिश ।
जरा नज़रे मिला लेना जरा सा मुस्करा देना॥
जो जाते हो चले जावो निशानी हम भी रख्गे।
तुम्हारे साथ जो गुजरी जवानी हम भी रख्गे॥
कई अफसाने लिखे है यहाँ पर बैठ कर तुमने ।
उसी फेहरिस्त में इक दो कहानी हम भी लिखेगे ॥
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