कई सारे वसीमो ने मुझे घर पर बुलाया था ।
बड़े ही नाज़ से उस नाजनी ने घर सजाया था ॥
बड़ी दुस्वारियो में कल वो मौका फिर गवां आया ।
बड़ी मुद्दत से जो मौका हमारे हाथ आया था ॥
मेरे पीछे कई लोगो ने कल मजमा लगाया था ।
कि जिस दम हमने आफिस को कदम अपना बढाया था ।।
मैं नज़रे फेर कर उस रस्ते को पार कर आया ।
मेरी खातिर जहाँ पर उसने ख़ुद दामन बिछाया था ॥
दिखा था चाँद रौशन चांदनी बिखरी मगर क्या है ।
उठाई थी नज़र मैंने कि कुछ उम्मीद होती है ।।
दशहरे की खुशी हम साथ मिल कर के मनायेगे ।
मगर अब चंद लोगो की यहाँ पर ईद होती है ॥
Sunday, September 27, 2009
Friday, September 11, 2009
बड़ा अरमान था
बड़ा अरमान था मुझको की मै तुम पर ग़ज़ल लिख दू ।
खुली जुल्फे घटा कह दू गुलाबी लव कवल लिख दू ॥
बिठा लू सामने अपने करुँ कुछ गुफ्तगुं दिल की ।
बुला लू चांदनी रोशन तुम्हे जीनत महल लिख दू ॥
मगर तुम तो समंदर हो ग़ज़ल बनती बिगड़ती है ।
अब तुम पर क्या ग़ज़ल कह दू अब तुम पर क्या ग़ज़ल लिख दू ॥
खुली जुल्फे घटा कह दू गुलाबी लव कवल लिख दू ॥
बिठा लू सामने अपने करुँ कुछ गुफ्तगुं दिल की ।
बुला लू चांदनी रोशन तुम्हे जीनत महल लिख दू ॥
मगर तुम तो समंदर हो ग़ज़ल बनती बिगड़ती है ।
अब तुम पर क्या ग़ज़ल कह दू अब तुम पर क्या ग़ज़ल लिख दू ॥
Tuesday, September 8, 2009
ये कैसे आई लव पे लाली गुलाब की ।
क्या झुक गई थी लव पे डाली गुलाब की ।
जर्बान रुक गई अरे जब लव पे बल पड़े ।
माहेशिकस्त बन के वो छत पर निकल पड़े ।
हम बुत से बन गए है और बुत है चल पड़े
खालिश खलिश में पड़ गया गुलनार कौन है ।
शब् आखिरे में निकला सरकार कौन है ।
हर गाम चुस्त था फिर कैसे फिसल पड़े ।
माहेशिकस्त बन के वो छत पर निकल पड़े ।
हम बुत से बन गए है और बुत है चल पड़े ।
Sunday, August 2, 2009
वो नाज़ुक
वो नाज़ुक फूल जिसको ढूढ़ते थे हम बहारो में ।
अभी नज़रे उठाई दिख गया वो उन कतारों में ॥
न हो मुझ पर यकी तो आईने से पूछ लो जाकर ।
अभी तक सुर्खी बाकी है हसी लव के किनारों में ॥
नज़ारा और क्या देखू नज़र भर उनको जो देखा ।
अब इससे और ज्यादा क्या हसी होगा नज़रो में ॥
अभी नज़रे उठाई दिख गया वो उन कतारों में ॥
न हो मुझ पर यकी तो आईने से पूछ लो जाकर ।
अभी तक सुर्खी बाकी है हसी लव के किनारों में ॥
नज़ारा और क्या देखू नज़र भर उनको जो देखा ।
अब इससे और ज्यादा क्या हसी होगा नज़रो में ॥
Sunday, July 26, 2009
बड़े अरमा
बड़े अरमां लिए दिल में उठे थे घर को जाने को ।
मगर अब हम बहुत बेताब है महफ़िल सजाने को ॥
बुघ्हे चेहरे नज़र मायूश लव खामोश है तो क्या ।
कही से ढूढ़ लायेगे हँसी चेहरा सजाने को ॥
कई नगमे , कई नज्मे , कई कौवालिया होगी ।
मगर अब हाथ उठेगे सिर्फ़ ताली बजाने को ॥
मगर अब हम बहुत बेताब है महफ़िल सजाने को ॥
बुघ्हे चेहरे नज़र मायूश लव खामोश है तो क्या ।
कही से ढूढ़ लायेगे हँसी चेहरा सजाने को ॥
कई नगमे , कई नज्मे , कई कौवालिया होगी ।
मगर अब हाथ उठेगे सिर्फ़ ताली बजाने को ॥
Thursday, June 11, 2009
नज़ारे दिख गए
नज़ारे दिख गए मुझसे नज़र भी देख ली मैंने ।
बड़ी फुरसत में बैठे हो नज़र थामे हुए दिल से ॥
तुम्हे यू देख कर कोई सरारत हो गई मुझसे ।
तो उठकर चल न देना तुम कही इस बार महफिल से ॥
बड़ी फुरसत में बैठे हो नज़र थामे हुए दिल से ॥
तुम्हे यू देख कर कोई सरारत हो गई मुझसे ।
तो उठकर चल न देना तुम कही इस बार महफिल से ॥
Tuesday, May 12, 2009
तेरा सर गर मेरे ...
तेरा सर गर मेरे कांधे पे आ जाए तो क्या होगा ।
मेरा दम फिर अगर उस दम निकल जाए तो क्या होगा ॥
ये दिल नादान है सुनता , नही करता है मन मानी ।
ये धड़कन फिर अगर उस दम ठहर जाए तो क्या होगा ।
तेरा जुल्फे गिरा कर अपने चेहरे पर चले आना ।
अगर उस दम कोई बिजली चमक जाए तो क्या होगा ॥
तेरे जलवों की ख्वाहिश थी तेरे जलवे नज़र आए ।
अगर जलवा किसी की जान ले जाए तो क्या होगा ॥
मेरा दम फिर अगर उस दम निकल जाए तो क्या होगा ॥
ये दिल नादान है सुनता , नही करता है मन मानी ।
ये धड़कन फिर अगर उस दम ठहर जाए तो क्या होगा ।
तेरा जुल्फे गिरा कर अपने चेहरे पर चले आना ।
अगर उस दम कोई बिजली चमक जाए तो क्या होगा ॥
तेरे जलवों की ख्वाहिश थी तेरे जलवे नज़र आए ।
अगर जलवा किसी की जान ले जाए तो क्या होगा ॥
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