Thursday, September 8, 2011

गुलाबों सा कोई मौसम

गुलाबों सा कोई मौसम, तुम्हे मिलने चला आये ।
उड़े बादल कहीं से मेघ बन, जुल्फों पे छा जाये ॥
मुबारक हो ये दिन खुशियाँ मिले, ये है दुवा रब से ।
कि मेघा हो सभी मौसम, तुम्हे मिलकर बता जाए ॥

कि आकर चाँद, तेरे चाँद से, चेहरे से मिल जाये ।
कि तुम को देख कर, सिमटी हुई कलियाँ भी खिल जाये ॥
छटा है इन्द्रधनुषी, और मौसम भी सुहाना है ।
तो क्या हो अब अगर मेघा कही घर से निकल आये ॥

सभी तारे खड़े है राह में तुमको सजाने को ।
कि जुगनू भी चमकते है तुम्हे राहें दिखाने को ॥
कि मंदिर कि कोई मूरत हो तुमको ढूढ़ते है सब ।
उसी रस्ते पे आये है 'अनिल' मंदिर बनाने को ॥

No comments:

Post a Comment